डॉ. राजीव बिंदल: एक विस्तृत प्रोफ़ाइल
डॉ. राजीव बिंदल हिमाचल प्रदेश भाजपा के वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष हैं। वे प्रदेश में पाँच बार विधायक रह चुके एक वरिष्ठ राजनेता हैं, और राज्य सरकार में स्वास्थ्य मंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष जैसे पदों पर भी आसीन रहे हैंhindustantimes.com। बिंदल को पार्टी संगठन में उनकी मजबूत संगठनात्मक क्षमता के लिए जाना जाता हैtribuneindia.com। नीचे उनकी राजनीतिक यात्रा, सामाजिक योगदान और व्यक्तिगत जीवन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।
राजनीतिक यात्रा
डॉ. राजीव बिंदल ने अपना राजनीतिक जीवन स्थानीय निकाय से प्रारंभ किया और समय के साथ राज्य की राजनीति में अहम मुकाम हासिल किया। उन्होंने विभिन्न चुनाव जीते, सरकार में मंत्री पद संभाला, विधानसभा अध्यक्ष रहे तथा पार्टी संगठन का नेतृत्व किया। उनके राजनीतिक सफर के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- 1995 – सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष पद से राजनीतिक करियर की शुरुआत कीjagran.com.
- 2000 – पहली बार सोलन विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव जीतकर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य बनेjagran.com.
- 2003 – पुनः सोलन से विधायक पद पर निर्वाचित हुएjagran.com.
- 2007 – लगातार तीसरी बार (सोलन से) विधायक बने और प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री नियुक्त हुएjagran.com.
- 2012 – निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन के बाद नाहन विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर चौथी बार विधायक बनेjagran.com.
- 2017 – नाहन से पाँचवी बार विधायक चुने गए; हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में नाहन सीट से उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी अजय सोलंकी से पराजय का सामना करना पड़ाjagran.com.
- जनवरी 2018 – हिमाचल प्रदेश विधान सभा के 13वें अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से निर्वाचित हुए और करीब दो वर्ष तक (जनवरी 2020 तक) इस पद पर कार्य कियाindianexpress.com.
- जनवरी 2020 – पहली बार हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने, किंतु स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक विवाद के कारण लगभग पाँच माह बाद मई 2020 में उन्होंने नैतिक आधार पर पद से त्यागपत्र दे दियाtribuneindia.com.
- अप्रैल 2023 – दोबारा हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुने गए (यह बिंदल का प्रदेशाध्यक्ष के रूप में तीसरा कार्यकाल है)jagran.com. वर्तमान में वह पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैंjagran.comjagran.com।
सामाजिक कार्य एवं जनसेवा
राजनीति के साथ-साथ डॉ. बिंदल समाजसेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। एक चिकित्सक होने के नाते उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है। बिंदल जनकल्याण की योजनाओं से जुड़कर तथा स्वयं संस्थान स्थापित कर प्रदेश की जनता की सेवा में जुटे रहे। उनके प्रमुख सामाजिक योगदान निम्नलिखित हैं:
- ग्रामीण चिकित्सा सेवा: आयुर्वेदिक चिकित्सा में स्नातक करने के बाद डॉ. बिंदल ने करीब तीन वर्ष बिहार के दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में रहकर निःशुल्क चिकित्सक के रूप में सेवा कीoneindia.com। संसाधनहीन गाँवों में मरीजों का इलाज कर उन्होंने प्रारंभिक करियर में ही जनसेवा की मिसाल कायम की।
- शिक्षा सेवा – हिमगिरी कल्याण आश्रम: बिंदल ने अपने गृह नगर सोलन में हिमगिरी कल्याण आश्रम की स्थापना की, जहाँ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आवास सहित निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती हैoneindia.com। यह आश्रम प्रदेश में उनके स्थायी सामाजिक योगदान का प्रतीक है।
- आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा: स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में प्रदेश में 108 एम्बुलेंस आपात सेवा की शुरुआत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इस मुफ्त एम्बुलेंस सेवा के चलते आरंभिक एक वर्ष में ही लगभग 90,000 मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई गईbusiness-standard.com, जिससे प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच मजबूत हुई।
- जन संपर्क और राहत कार्य: बिंदल जन समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहे हैं। महामारी जैसे संकट के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के प्रयासों में भी उन्होंने हिस्सा लिया (2020 में प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफे के वक्त उन्होंने पार्टी द्वारा किए राहत कार्यों का ज़िक्र किया थाindianexpress.com)। अपने क्षेत्र नाहन में भी वे नियमित तौर पर जनसभाएँ व स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते रहे हैं, जिससे जनता से उनका जुड़ाव मज़बूत बना रहा।
व्यक्तिगत जीवन
डॉ. राजीव बिंदल का जन्म 12 जनवरी 1955 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ थाoneindia.com। उनके पिता वैद्य बालमुकुंद बिंदल आयुर्वेद के चिकित्सक थे, जिनकी प्रेरणा से राजीव ने भी आयुर्वेदिक चिकित्सा 분야 को अपने करियर की शुरुआत के लिए चुना। राजीव बिंदल ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से आयुर्वेदाचार्य (आयुर्वेदिक मेडिसिन एवं सर्जरी में स्नातक) की डिग्री प्राप्त कीoneindia.com। शिक्षावस्था पूरी करने के बाद कुछ समय तक उन्होंने चिकित्सक के रूप में कार्य किया और फिर सार्वजनिक जीवन व राजनीति की ओर अग्रसर हुए।
बिंदल का विवाह हुआ है और उनका परिवार भी सामाजिक सेवा से जुड़ा हुआ है। अपनी चुनावी शपथ पत्र में बिंदल ने अपने पेशे को “सामाजिक कार्यकर्ता एवं विधायक” के रूप में दर्ज किया है, वहीं उनकी पत्नी एक गृहिणी होते हुए सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान देती हैंmyneta.info। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद बिंदल सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना पसंद करते हैं। एक डॉक्टर होने के नाते स्वास्थ्य जागरूकता एवं योग आदि में भी उनकी रुचि रही है, जिसका लाभ वे जनता से जुड़े कार्यक्रमों में उठाते हैं।
मीडिया प्रोफ़ाइल एवं प्रमुख उल्लेख
डॉ. राजीव बिंदल के लंबे राजनीतिक अनुभव और कार्यशैली पर समय-समय पर मीडिया में प्रकाश डाला गया है। उन्हें एक अनुशासित, जनहितैषी तथा संगठन कौशल में निपुण नेता के रूप में पेश किया जाता रहा है। प्रमुख समाचार पत्रों और लेखों में उनके बारे में निम्न टिप्पणियाँ उल्लेखनीय हैं:
- संगठन क्षमता की सराहना: द ट्रिब्यून जैसे प्रतिष्ठित समाचार स्रोत ने बिंदल को एक पाँच बार विधायक रह चुके अनुभवी नेता के रूप में वर्णित किया है, जो अपनी “असाधारण संगठनात्मक क्षमता” के लिए प्रशंसा प्राप्त करते हैंtribuneindia.com। पार्टी संगठन में उनकी पकड़ मज़बूत मानी जाती है और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया है।
- नेतृत्व पर विश्वास: 2023 में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में बिंदल की तीसरी बार तैनाती को मीडिया ने पार्टी नेतृत्व का उन पर विश्वास जताने वाला कदम कहा। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पुनर्नियुक्ति ने “संगठन को उनकी नेतृत्व क्षमता पर विश्वास” को प्रतिबिंबित कियाindianexpress.com। पार्टी के भीतर बिंदल को आगामी चुनावों में भाजपा को मज़बूती से पुनर्गठित करने की जिम्मेदारी के रूप में देखा गया है।
- नैतिक आदर्श की छवि: मई 2020 में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक भ्रष्टाचार जांच प्रकरण के दौरान बिंदल ने अपना प्रदेशाध्यक्ष पद यह कहते हुए छोड़ दिया था कि वह नैतिक मूल्यों के तहत पद त्याग रहे हैं ताकि जांच प्रभावित न होindianexpress.com। इस घटना को मीडिया में उनके उच्च नैतिक मानदंड पालन करने वाले नेता की छवि से जोड़कर देखा गया। स्वयं बिंदल ने अपने त्यागपत्र पत्र में लिखा कि वह “उच्च नैतिक आधार” पर इस्तीफ़ा दे रहे हैंindianexpress.com, जिससे उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया और विपक्ष के आरोपों के बीच पार्टी की मर्यादा बनाए रखने का संदेश दिया।